
बलरामपुर, छत्तीसगढ़
सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर के नेतृत्व में शुक्रवार को आदिवासी समाज के पदाधिकारीयो ने बलरामपुर संयुक्त जिला कार्यालय पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से आदिवासी समाज ने 2026 में प्रस्तावित जाति जनगणना में आदिवासी धर्म कोड को अलग से शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि
वर्तमान जनगणना प्रक्रिया में केवल छह धर्म—हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन—को ही मान्यता प्राप्त है, जबकि भारतवर्ष में करोड़ों की संख्या में निवास करने वाले आदिवासी समुदाय की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है। उल्लेखनीय है कि 1871 से 1951 तक की जनगणनाओं में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड था, जिसे बाद में समाप्त कर दिया गया।
आदिवासी समाज ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पूजा-पद्धति प्रकृति से आधारित है सुप्रीम कोर्ट द्वारा 5 जनवरी 2011 को दिए गए निर्णय का हवाला देते हुए ज्ञापन सौंपा है समाज के
लोगों ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार आगामी जनगणना में आदिवासी धर्म कोड को शामिल नहीं करती है, तो समस्त आदिवासी समाज जनगणना करता पदाधिकारीयो का बहिष्कार और विरोध प्रदर्शन करने को बाध्य होगा।







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