बलरामपुर विजय सिंह@ जनपद पंचायत बलरामपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत तरकाखांड़ में मनरेगा योजनाओं के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों को नियमों को दरकिनार करते हुए जेसीबी, पोकलेन और ट्रैक्टर जैसी मशीनों से कराए जाने का मामला प्रकाश में आया है। जिससे पंजीकृत ग्रामीण मजदूरों को रोजगार से वंचित होना पड़ा है। इसको लेकर गांव में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा शासन की मंशा के विपरीत कार्य कराए गए हैं, जिससे न केवल मजदूरों को रोजगार से वंचित होना पड़ा, बल्कि वे रोज़ी-रोटी की तलाश में पलायन को भी मजबूर हो गए हैं। इस पूरे प्रकरण में सरपंच एवं ग्राम रोजगार सहायक की संदिग्ध भूमिका को लेकर भी ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों की शिकायत पर बलरामपुर कलेक्टर द्वारा गंभीरता से संज्ञान लेते हुए जांच टीम गठित कर गांव में भेजी गई। टीम के पहुंचते ही ग्राम के कुछ दबंगों में हलचल मच गई। वहीं, मौके पर करीब पांच दर्जन से अधिक ग्रामीण मौजूद थे जिन्होंने जांच टीम के समक्ष अपनी शिकायतें दर्ज कराई।
जांच के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब उपसरपंच और उनके सहयोगियों द्वारा मुख्य शिकायतकर्ता कौशल यादव के साथ गाली-गलौज एवं मारपीट की गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शिकायतकर्ता पर जानलेवा हमला भी किया गया। ग्रामीणों ने बड़ी मुश्किल से उसे हमलावरों से बचाया और तत्काल बलरामपुर सिटी कोतवाली को सूचना दी गई। पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत सचिव की हड़ताल के दौरान करीब दस मनरेगा कार्य मशीनों से कराए गए, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है। जांच टीम की उपस्थिति में खुलेआम हिंसा किया जाना इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं शिकायतें सही हैं और उन्हें दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए







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