
Balrampur@छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी आदिवासी समाज बलरामपुर के जिलाध्यक्ष बसंत कुजूर ने मीडिया से बात करते हुए बश गहरी प्रसन्नता और गर्व के साथ बताया कि आदिवासी समाज के युवा प्रतिनिधि डॉक्टर एनाबेल बेन्जामिन बड़ा को यूनेस्को के ग्लोबल स्टॉक फोर्स की संचालन समिति के जिम्मेदारी एक बार फिर से मिली है यह नियुक्ति वर्ष 2025 के कार्यकाल के लिए की गई है इसके पूर्व डॉ बड़ा ने वर्ष 2022-24 तक इस पद पर सफलतापूर्वक कार्य किया था वह उन्होंने कहा कि पुनः नियुक्ति आदिवासी समाज के लिए न केवल गर्व का विषय है बल्कि यह वैश्विक स्तर पर आदिवासी भाषाओं और अधिकारों के संरक्षण के प्रति उनका समर्पण के ऐतिहासिक मानता भी है पहला युवा आदिवासी यूनेस्को के आदिवासी भाषाओं के ग्लोबल टास्क फोर्स के सह अध्यक्ष पद पर पुनः नियुक्त आदिवासी अधिकारों और भाषा संरक्षण के प्रति उनके अथक समर्पण को एक महत्वपूर्ण पहचान देते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एसएमएस) में सहायक प्रोफेसर डॉ. अनाबेल बेन्जामिन बड़ा को यूनेस्को द्वारा अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी भाषा दशक (IDIL) 2022-23 के लिए गठित ग्लोबल टास्क फोर्स की संचालन समिति के सह अध्यक्ष के रूप में दूसरे कार्यकाल 2025 ,27 के लिए पुनः नियुक्ति किया गया है। डॉक्टर बड़ा ने (2022-24) तक भी इस पद पर कार्य किया था। यह पुनः नियुक्ति एक ऐतिहासिक छड़ हैं क्योंकि झारखंड के गुमला जिले के ग्राम पंचायत बेड़ो के उरांव आदिवासी समुदाय से आने वाले डॉ बड़ा भारत के पहले ऐसे आदिवासी हैं जिन्हें एशिया से आदिवासी लोगों और आदिवासी संगठनों द्वारा यूनेस्को में इस प्रतिष्ठित वैश्विक पद के लिए चुना गया है।
उनका निरन्तर नेतृत्व दुनियां की आदिवासी भाषाओं को संरक्षित और बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण आवश्यकता पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय फोकस को रेखांकित करता है। डाक्टर बड़ा का राष्ट्रीय क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर आदिवासी समुदायों के साथ व्यापक जुड़ाव उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। एक उत्साही वकिल के रूप में उन्होंने ने आदिवासी भाषाओं संस्कृति, परम्पराओं पर और अधिकारों के संरक्षण सुरक्षा और संवर्धन के लिए अथक प्रयास किया है। उनका प्रभाव विभिन्न संयुक्त राष्ट्र मंचों तक फैला हुआ है, जहां उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा, संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन संयुक्त राष्ट्र आदिवासी मुद्दों पर स्थाई मंच आदिवासी लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ तंत्र और आदिवासी लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा पत्र से संबंधित चर्चाओं में आदिवासी लोगों का प्रतिनिधित्व किया है, साथ ही आदिवासी लोगों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक के साथ भी बैठकें की है।
वैश्विक कार्य बल के सह-अध्यक्ष के रूप में अपने पहले कार्यकाल के दौरान डॉ. बड़ा ने विश्व स्तर पर स्वदेशी भाषाओं को पुनर्जीवित करने और उनमें नई जान फुंकने के उद्देश्य से की पहल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आदिवासी समुदायों के लिए डिजिटल समावेशन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को डिजिटल समानता और डोमेन नामक एडहॉक समूह के सह-अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति से और भी बल मिलता है, जो आईडिल के लिए वैश्विक कार्य बल का एक महत्वपूर्ण अंग है। वह इस पद पर नियुक्त होने वाले पहले आदिवासी हैं। तथा उरांव समाज एवं समस्त आदिवासी समाज में खुशी की लहर है। हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आदिवासियों की संस्कृति, बोली,भाषा की संरक्षण सुरक्षा और संवर्धन के लिए आदिवासियों के लिए अहम भूमिका निभाने में सक्षम होंगे।






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