बलरामपुर @छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है।
एक बाप, जो खुद का बच्चा बीमार होने से परेशान था… लेकिन इलाज नहीं, डॉक्टर नहीं — उसने चुना अंधविश्वास का रास्ता!
और उसी रास्ते ने उसे बना दिया एक हैवान!
3 साल का मासूम अजय नगेसिया
…महज एक फूल-सा बच्चा, जिसे जंगल में महुआ बीनने गया था अपने परिवार संग,
लेकिन फिर अचानक लापता हो गया।
परिवार की शिकायत पर पुलिस ने जब सर्च ऑपरेशन शुरू किया,
तो जो सामने आया — वो रूह कंपा देने वाला था।
कटईडीह गांव, थाना चांदो
यहां के रहने वाले 40 वर्षीय राजू कोरवा ने पुलिस को जो बताया — उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया।

राजू का कबूलनामा (रिपोर्टिंग टोन में)
“मेरे बेटे की तबीयत खराब थी… गांव के ओझा ने कहा – किसी मासूम की बलि चढ़ाओ,
महादानी देवता खुश होंगे… और बेटा ठीक हो जाएगा।”
बस फिर क्या था… अंधविश्वास में डूबे राजू ने रची खौफनाक साजिश।
घटना की दरिंदगी
राजू ने 3 साल के अजय को चॉकलेट और बिस्किट का लालच देकर अपने घर बुलाया,
फिर लोहे की छुरी से उसका गला रेत दिया।शव के टुकड़े-टुकड़े किए…
बोरे में भरकर नाले में ले जाकर जला दिया।सिर को 3 दिन तक छुपाकर रखा और बाद में गड्ढा खोदकर दफना दिया।
हत्या में प्रयुक्त लोहे की छुरी बरामद
मासूम का कंकाल और सिर का अवशेष भी बरामद थाना सामरीपाठ पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
आरोपी के खिलाफ अपराध कमांक 13/2024 दर्ज:
धारा 363 – अपहरण
धारा 302 – हत्या
धारा 201 – सबूत छिपाने का प्रयास
हमने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को पकड़ लिया है। जांच जारी है। समाज को ऐसे अंधविश्वास से बाहर निकलने की ज़रूरत है।”
सख्त संदेश के साथ
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि अंधविश्वास कितना खतरनाक हो सकता है।
आज के दौर में भी जब विज्ञान और शिक्षा हर कोने में पहुंच रहे हैं,
तब भी तंत्र-मंत्र और झूठे देवताओं के नाम पर नरबलि जैसी कुप्रथा ज़िंदा है।समाज को जागने की ज़रूरत है!
वरना अगला शिकार कोई और मासूम हो सकता है।






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